anapansati buddha

आनापानसति ध्यान प्रयोग पे कुछ जरूरी जानकारीयाँ

प्रारम्भ मे ध्यान का अभ्यास अँधेरे कमरे मे करे

फिर अपनी सुविधा नुसार कुर्सी ,चटाई या कम्बल ,सोफे ,पलँग आदि कही भी बैठ सकते है आप को तन कर नही बैठना है , आराम से लेकिन रीढ़ की हड्डी सीधी रहे . क्योकि ध्यान हेतु आप के शरीर को कष्ट न हो ऐसे बैठे ,ध्यान हेतु शरीर और मन दोनो का एक होना जरुरी है अतः आराम से बैठे किसी तरह का बैचेनी न हो ,दोनो हाथो के अँगुलियो को आपस मे फँसा ले परन्तु कसाव नही हो ,दोनो पैरो को क्रास कर बैठे अर्थात आलती पालती बना कर बैठे ,अब आँखे बँद कर ले ,ईस तरह बैठने से ऊर्जा का एक दायरा बन जायेगा , अब अपना पूरा ध्यान साँस पर ले आये ,साँस को मन की आँखो से देखे , आती जाती सहज साँस को देखे , प्रारम्भ मे आप को अपना साँस अटपटा और उखडा मालूम होगा पर कुछ दिन मे आप का साँस एकदम ठीक आने लगेगा और उसे देखने मात्र से आप शाँत होने लगेँगे ,जान बूझकर साँस न ले ,आप को मात्र देखना है जब मन भटकने लगे तो फिर साँस

onkar kumar
I am a software enginner in an MNC with deep interest in spiritual stuffs . I have knowledge of healing such as Reiki , Prana voilet healing , Crystal healing etc .
I am Reiki Grand master , love meditation and inspire everyone to experience peaceful and blissful life .
It would be awesome if you would share your knowledge and experience . Thank you .