ज्ञान कोई जादू से नहीं बल्कि सतत प्रयास से संभव


त्राटक में सावधानियॉ

दोस्‍तों मै सुबह उगते हुये लाल सूर्य पर रोज दस मिनट त्राटक करता था लेकिन एक दिन कुछ देर से शुरू किया।। पता नही चला कि उसकी तीव्रता बदल चुकी है। केवल दो या तीन मिनट ही कर पाये तो आंखों के अंदर कुछ अजीब सा फील हुआ तो त्राटक बंद करके नीचे आ गये।। फिर जहां देखते थे वहां पर एक काला निशान मेरी नजर के सामने चलता था मैैने सोचा कि चमक की वजह से ऐसा हो रहा है थोडी देर में ठीक हो जायेगा लेकिन वो ठीक नही हुआ और फिर आंखों में दर्द होने लगा।। क्‍योंकि मेरा कार्निया यानि की आंख की पुतली जल गयी थी।। (उस समय मै नही जानता था कि ऐसा हो गया) उसके इलाज के लिये सैंकडों डाक्‍टरों के पास दो तीन साल तक चक्‍कर लगाता रहा तब एक डाक्‍टर ने बताया कि यदि तेज चमक की वजह से कार्निया जल गया है ताे ये कभी ठीक नही हो सकता चाहे आप कितना ही इलाज कर ले।। उसकी बात मुझे सही लगी क्‍योंकि मै सालो तक डाक्‍टरों के पास दौडने के अलावा लाखों रूपये भी फूक चुका था ।। तब दुखी होकर मेैने अपना इलाज बंद कर दिया। वो सब ऐसे ही चलता रहा और मै सोचने लगा कि ये सब ऐसे ही बढता जायेगा और अंत में मैं अंधा हो जाउंगा।। फिर मै सब तरफ से निराश होकर ईश्‍वर से प्रार्थना करने लगा।। फिर धीरे धीरे वो सब ठीक हो गया और उसका कोई चिन्‍ह भी अब बाकी नही है मगर ये सब होने में दस बारह साल लग गये। इसलिये सभी साधकों से अनुरोध है कि तुरन्‍त शक्ति प्राप्‍त करने के चक्‍कर में अपने आंखों और शरीर के साथ किसी प्रकार की जबरदस्‍ती व उल्‍टे सीधे प्रयोग ना करें।। शक्तिया व सिद्धियों केवल सही प्रकार से साधना करने से समय के साथ ही आती है और ये निर्भर करता है आपकी मानसिकता और निरन्‍तरता पर। लोग समझते है कि सूर्य या अग्नि पर त्राटक करेंगे तो सिद्ध पुरूष बन जायेंगे।। तो बता दे कि उनका ये सोचना गलत है। सारी शक्तिया सारी सिद्धिया व समाधि ध्‍यान की किसी भी एक विधि को अपनाने पर ही प्राप्‍त हो जाती है मगर ये तभी सम्‍भव है जब प्रतिदिन सही तरह से उसका अभ्‍यास किया जाये।। मगर अधिकतर लोग किसी प्रकार का अभ्‍यास करने के अलावा हर समय कोई शार्टकट और शक्तिपात से कुण्‍डलिनी जागरण तक का सपना देखते है ये उसी प्रकार है जैसे आप बिना किसी प्रकार का व्‍यवसाय किये बिना लोगों के पैर पकड कर गिडगिडाते हुये एक करोड रूपये भीख में देने की प्रार्थना करते रहे।। कितनी शर्म नाक बात है भौतिक जीवन में सब कुछ फ्री फण्‍ड का चाहिये और अध्‍यात्मिक में भी।। हम अपने चरित्र अपने विचार खानपान रहनसहन दिनचर्या मं कोई बदलाव कोई उत्‍कष्‍टता ना लाये और कोई मुफत में हमे सर्वशक्ति सम्‍पन्‍न बना दे।। उसके बाद हम उन शक्तियों का इस्‍तेमाल दूसरो की गुप्‍त बातें जानने व उनके धन को हडपने और उनको अपने इशारों पर नचाने के लिये कर सके।। अपनी ऊर्जा बचाना ही अध्‍यात्‍म का सिद्धांत हेै तो मुफतखोर टाइप के लोगों ने इसकाे दूसरे नजरिये से देख कर कितना सीधा समाधान निकाल लिया कि अध्‍यात्‍म में प्रवेश के लिये जो उर्जा खर्चा करनी होती है उसको भी बचा लें।। वाह।। बहुत अच्‍छे। लगे रहिये। हो सकता है कि कोई बाबा जी आपसे कुछ पैसे लेकर आपके लिये ये व्‍यवस्‍था भी कर दे। बहुत से लोग ये करवा चुके है मगर उनको खुद समझ में नही आता कि इससे क्‍या बदलाव हुआ और वो इसी वहम में जीने लगते है कि मैं अब सर्वशक्तियों व सिद्धियों का मालिक हो गया।। मगर होता कुछ नही है लेकिन बीस तीस हजार फूंक कर उसकी मुफत में पाने वाली इच्‍छा पूर्ण हो जाती है और वो संतुष्‍ट होकर बैठ जाता है कि अब वो सिद्ध पुरूष हो गये और अध्‍यात्‍म में आगे जाने का उसका मार्ग बंद हो जाता है।। अगर आप अपने विवेक का इस्‍तेमाल करते हुये सोचेंगे तो आपको समझ में आ जायेगा कि दुनिया मे मुफत में कब किसको क्‍या मिला है ।। मुफत में कुछ मिलने के लालच में अपना पेसा समय और इज्‍जत गंवाने के अलावा हाथ में कुछ नही आता। आप खुद फैसला कर लीजिेय।।

Neeraj Mittal