साधना में ब्रहमचर्य

साधना में ब्रहमचर्य

काम क्रिया में असमर्थ होने का मतलब ये नही कि वो ब्रहमचारी है।। जिसके मन में ही काम वासना ना उठे वो ब्रहमचारी है। मन में काम वासना उठ रही है हम उसका दमन कर रहे है ये ब्रहमचर्य नही है। इसका जितना दमन करेंगे ये उतना ही सिर उठायेगी।।
अध्‍यात्‍म काे ब्रहमचर्य से जोड कर ही अध्‍यात्‍म का सत्‍यानाश किया गया है और लोग ये समझते है कि शारीरिक रूप से सेक्‍स ना करना ही ब्रहमचर्य है। असल में सेक्‍स क्रिया को गलत समझने की वजह से ही अध्‍यात्‍म मे आदमी सफल नही हो पाता क्‍योंकि इसकी वजह से हमारे मन में अपने प्रति अविश्‍वास जागता है हम समझते है कि हमने सेक्‍स करके महापाप किया। जबकि सेक्‍स भी अन्‍य सामान शारीरिक क्रियाओं की तरह से एक सामान्‍य क्रिया ही है इसको अन्‍यथा ना लें।।
आप लोगों ने डिस्‍कवरी चैनल पर देखा होगा कि विदेशी आदमी क्‍या क्‍या नयी नयी खोजे करते रहते है। विदेशी पिक्‍चरों में देखिये वो नयी नयी थीम लेकर आती है जिनको देख कर ही आश्‍चर्य चकित रह जाना पडता है। वो कुछ और इस लिये सोच पा रहे है क्‍योंकि वो सेक्‍स की भूख से दबे हुये नही है। उनको ये नही बताया गया कि सेक्‍स गलत चीज है।।
हमारे देश में ऐसा नही है हमको बताया गया है कि सेक्‍स गलत है इसी वजह से आदमी यहां पर सेक्‍स के अलावा कुछ सोचता ही नही है। हमारी प्रत्‍येक फिल्‍म मे लडके लडकी के प्‍यार मोहब्‍बत की कहानी और खानदानी दुश्‍मनी के अलावा कुछ नही दिखाया जाता और जब सारी समस्‍याये समाप्‍त हो जाती है और उनका विवाह निश्चित हो जाता है तो पिक्‍चर समाप्‍त हो जाती है ये फिल्‍में क्‍या संदेश देती है समझ में नही आता।। हमारी पिक्‍चरों में बार बार गंदे सीन दिखाये जाते है मगर विदेशी पिक्‍चरों में एक भी गंदा सीन नही आता। वहां जो फिल्‍में उस नजरिये से बनती है उसमें सब कुछ दिखाते हे मगर यहां पर हर पिक्‍चर में एक ही थीम बार बार जोर मारती रहती है।।
हमारे देश में यदि धूप बत्‍ती या अगरबत्‍ती का भी विज्ञापन आता है तो यही लगता है कि सेक्‍सक्रिया का विज्ञापन है।। बाद में पता चलता है कि अरे ये तो अगरबत्‍ती का था।। आप ने देखा होगा कि बहुत से लोगों ने अध्‍यातम के नाम पर घर बार छोड दिया किसी साधु की टोली में रह रहे है भीख मांग कर खा रहे है और दिन भर नशेबाजी में डूबे हुये है। नशे बाजी में क्‍यों डूबे है? वो अपनी कामवासना का दमन नशे बाजी के माध्‍यम से कर रहे है। बहाना करते है कि शिव गांजा पीते है तो हम भी पी रहे है शिव भांग खाते है तो हम भी खा रहे है।। वो सेक्‍स नही कर रहे मगर बहमचारी नही हुये और नशेबाजी के माध्‍यम से पतन के गर्त में जा रहे है।। अध्‍यात्‍म से उनका कुछ लेना देना नही है।।
अब मान लेा कि हम अध्‍यात्‍म के नाम पर ब्रहमचारी होने की नौटंकी करे। अपने जीवन साथी से सम्‍बन्‍ध ना बनाये। मान लेा कि हमने अपने मन पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया और ब्रहमचारी हो गये।। मगर हमारा जीवन साथी तो ब्रहमचारी नही हो गया। उसके मन में तो काम वासना पूर्ववत ही है जो कि गलत नही है। इस दशा में यदि वो किसी बाहरी व्‍यक्ति से सम्‍बन्‍ध स्‍थापित कर ले तेा हमको फिर बुरा नही मानना चाहिये और बेशरम बन कर उसके उस अवैध कहलाने वाले सम्‍बन्‍ध को स्‍वीकार कर लेना चाहिये।। जो कि मेरी नजर में गलत नही है। यदि आप उसकी जरूरते पूरी नही कर सकते तो वो कही से करेगा ये उसका हक है ये पाप नही है।। पाप तो वो है जो आप अपनी जिम्‍मेदारी से भाग के कर रहे है।।
आजतक हजारों ग्रहस्‍थ साधक हुये है जो कि साधना में उच्‍चतम अवस्‍था तक पहुचे है।। आप इसको भी एक सामान्‍य क्रिया की तरह समझ कर अपनी साधना करते रहिये। ईश्‍वर ने हमे ग्रहस्‍थ बना कर भेजा है यानि कि हमको इसी अवस्‍था में रहकर साधना करनी है। यदि हम इससे दूर भागेंगे तो सफलता से उतना ही दूर होते जायेंगे। साधना के नाम पर घर छोड कर अकेले रहने वालों की अपेक्षा ग्रहस्‍थ साधकों की संख्‍या ज्‍यादा है जिन्‍होंने साधना में सफलता व सिद्धि प्राप्‍त की है। यदि आप कामवासना से दूर भागते रहे वो आपके दिमाग पर हावी होती रही आप दिन भर इधर उधर अपनी गंदी नजर डालते रहे तो समझ लीजिये कि आप साधना के नाम पर पतन के मार्ग पर चल रहे है। मगर इसका ये मतलब भी नही कि आप इधर उधर अवैध सम्‍बंध बनाते रहे या सब पर कामुक नजर डालते रहे। अपने जीवन साथी के साथ ग्रहस्‍थ धर्म का निर्वाह करते हुये साधना करते रहिये। यही ब्रहमचर्य है।।
साधना में सिर्फ मन की विचार शून्‍यता का ही महत्‍व है।। यदि हम अपने मन को नियन्त्रित नही कर रहे दिन भर इधर उधर के बेकार के कामों में लगे है मन में विचारों का कचरा भर रखा है तो इस मार्ग पर कभी सफल नही हो सकते चाहे जितना प्रयास कर ले व चाहे जितना ब्रहमचर्य का पालन कर लें।।
किन्‍तु हम फेसबुक व इंण्‍टरनेट पर यदि दिन भर गंदे फोटो व फिल्‍म देखते रहते है उनकेा दिल में बसाते रहते है तो साधना के समय वही सब मन में घूमेगा।। उस दशा में कामवासना दिन दूनी रात चौगुनी बढती जायेगी जितना उसको शान्‍त करेंगे वो उतना ही तमाशा करेगी।। हम गंदे विचारों से दूर रहे गंदी फिल्‍में व फोटो ना देखे हर जगह गंदी नजर ना डाले तो समझ लो कि बंहमचर्य हो गया। उसके लिये अपने ग्रहस्‍थ की जिम्‍मेदारी से भागने की आवश्‍यकता नही है। अपने जीवन साथी के साथ जरूरत होने पर सम्‍बन्‍ध निभाओं और भूल जाओ।।
साधना में सफल नही हो रहे तो उसके लिये ब्रहमचर्य को जिम्‍मेदार ना मानते हुये अपनी दिनचर्या और मन में चलने वाले विचारों पर ध्‍यान दो। कितनी देर टीवी देखते हो कितनी देर इंण्‍टरनेट चलाते हेा कितनी देर अखबार करते हो कितनी देर दूसरों के लिये चिन्‍तन करते हो?
अपनी इन सब कमियों को दूर कर लेा बिना ब्रहमचर्य के ही आगे बढ जाओगे।। साधना में सफलता इसलिये नही मिूल रही क्‍योंकि हम साधना के समय में एकत्र की हुई एनर्जी को पूरे दिन व्‍यर्थ के विचारों में खर्चा कर देते है और अगले साधना के समय तक खाली हाथ हो चुके होते है।। यही क्रम चलता रहता है यदि आगे बढना है तो सिर्फ साधना के समय में ही विचारों को नही रोकना है बल्कि हर समय फालतू के विचारों से दूर रहने का प्रयत्‍न करना होगा जिससे कि हम हर समय खुद को प्राप्‍त होने वाली एनर्जी को बचा कर साधना मार्ग में आगे बढ सके।। आत्‍मशक्ति या एनर्जी हमें सिफ्र साधना के समय में ही नही मिलती वो तो हमे हर समय ब्रहमाण्‍ड से मिलती रहती है मगर हम उसे व्‍यय के बदले अपव्‍यय करते रहते है।।
यदि ब्रहमचर्य और साधना का कोई रिश्‍ता होता तो समस्‍त पागल जो कि काम क्रिया के विषय में ना कुछ जानते है ना सोचते है ना उन्‍होने कभी काम क्रिया की उनका सारा वीर्य संरक्षित होता और उनकी कुण्‍डलिनी जाग जाती व ईश्‍वर तक पहुच जाते।।

Neeraj Mittal