शिवलिंग का आध्यात्मिक रहस्य

Shivling The ultimate wisdom

ॐ नमः शिवाय सम्भोग क्रिया में चित्त से कुछ ही क्षण के लिए ही सही अहंभाव लुप्त हो जाता है और आनंद घटित होता है । इस समय प्रेम का ही अस्तित्व रह जाता है , क्रोध , घृणा , लोभ , मोह इत्यादि विकृतियों का नामोनिशान नहीं रहता। क्योंकि ये विकृतियां तभी तक हैं … Read more

10 दिवसीय विपासना ध्यान कोर्स का अद्भुत अनुभव

vipasana

मैं काफी समय से स्व० श्री सत्य नारायण गोयंका जी के द्वारा करवाए जाने वाले दस दिवस के आवासीय कोर्स के बारे में सुनता आ रहा था और अब जाकर इसे स्वयं करने का मौका मिला . मेरा कोर्स इंदौर के धम्म मालवा विपासना ध्यान केंद्र पे 6 दिसम्बर को शुरू होकर 17 दिसम्बर को … Read more

Reiki Chakra balancing and meditation

चक्र उन महत्वपूर्ण उर्जा केन्द्रों को कहा जाता है जहाँ पे ऊर्जा का ठहराव होता है | मुख्यतः सात चक्रों के अलावा कुछ चक्र हमारे सर के उपर होते हैं और कुछ पैर के निचे भी | रेकी में मुख्य चक्र के साथ हथेलियों के मध्य में स्थित उर्जा केन्द्रों का भी महत्व है | … Read more

॥ होश में रहकर जीने का तरीका ॥

ओशो पहला चरण: अपने शरीर को लेकर पूरी तरह सचेत होना। . . . बुध ने कहा, जब तुम चलते हो तब तुम्हारे मन को पता होना चाहिए कौन-सा पैर आगे गया और कौन-सा पैर पीछे गया। जब तुम भोजन करते हो, तब खुद को भोजन करते हुए देखो। भोजन मुह में किसी मशीन कि तरह … Read more

विपासना साक्षी ध्यान ओशो

Buddha Vipassana meditation

बुद्ध ने तो कहा: तुम तो बैठ जाओ, श्वास तो चल ही रही है; जैसी चल रही है बस बैठकर देखते रहो। जैसे राह के किनारे बैठकर कोई राह चलते यात्रियों को देखे, कि नदी तट पर बैठ कर नदी की बहती धार को देखे। तुम क्या करोगे? आई एक बड़ी तरंग तो देखोगे और … Read more

हर चक्र की अपनी नींद—ओशो

chakra chart

सहस्‍त्रार को छोड़ कर प्रत्‍येक चक्र की अपनी नींद है। सातवें चक्र में बोध समग्र होता है। यह विशुद्ध जागरण की अवस्‍था है। इसीलिए कृष्‍ण गीता में कहते है कि योगी सोता नहीं। ‘योगी’ का अर्थ है जो अपने अंतिम केंद्र पर पहुंच गया। अपनी परम खिलावट पर जो कमल की भांति खिल गया। वह … Read more

Meditation through Baglamukhi beeja mantra

Baglamukhi , Beeja mantra , meditation

  ध्यान मतलब निर्विचार अवस्था . चांदनी रात में जिस तरह तालाब में कंकड़ मरने से चाँद नहीं दिखता और अगर दिखता भी है तो साफ़ नहीं . वैसे ही हमारा मन विचारों की तरंगों से इस तरह कम्पित है की अपने अंदर बैठे परमात्मा की झलक ही नहीं मिलती . और अगर कभी मिलती … Read more