रेकी सभी के लिए :- एक वैज्ञानिक विश्लेषण

reiki attunement

रेकी कोई क्रिया नहीं बल्कि ऊर्जा का प्रवाह है | रेकी चिकित्सक सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हर तरफ मौजूद ईश्वरीय उर्जा को अपने माध्यम से प्रदान करता है | इसके बारे में एक प्रचलित कहावत है की “आप रेकी को नहीं बल्कि रेकी आपको चुनता है” | कुछ लोग जन्म के साथ ही इसे लेकर पैदा होते हैं | मास्टर का कार्य बस इतना है की ईश्वरीय उर्जा के साथ अपने शिष्य का कनेक्शन कर देता है मतलब एक चैनल बना देता है जिससे उसके चक्र खुल जाते हैं और उर्जा का प्रवाह हाथों से होने लगता है | रेकी दीक्षा में मुख्य चक्र जिनको खोला जाता है वो हैं – सहस्त्रार , आज्ञा , विशुद्ध , अनाहत और हाथ के चक्र |

ऐसा माना जाता है की अभी का समय बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि लोगों के अध्यात्मिक स्तर में बहुत ज्यादा बदलाव आ रहे हैं | हमारा शरीर दिखता तो स्थूल है लेकिन अगर गहरे में जायें तो सब कुछ निश्चित फ्रीक्वेंसी पे वाइव्रेट ( दोलन ) कर रहा है | हमारा शरीरी उर्जा का संघनित स्वरुप है जो सुक्ष रूप में दोलन कर रहा है , इसी तरह सूक्ष्म , कारण , मानसिक शरीर भी किसी निश्चित फ्रीक्वेंसी पे दोलन कर रहे हैं | अपने अंदर में जो सात चक्र हैं उनके विभिन्न रंग अलग अलग फ्रीक्वेंसी के कारण ही है |

एक सूत्र है E = h X V जहाँ पे V फ्रीक्वेंसी को दर्शाता है , h प्लैंक कांस्टेंट है . इस तरह से हम देखें तो उर्जा और फ्रीक्वेंसी सीधी तरह एक दुसरे पे निर्भर हैं | जितनी ज्यादा फ्रीक्वेंसी उतनी ही उर्जात्मक शरीर और उससे जुड़े चक्र |

रेकी दीक्षा में चक्रों की फ्रीक्वेंसी को और ज्यादा बढाया जाता है जिससे की उनकी शक्ति और शिष्य का अध्यात्मिक स्तर और बढे | ज्यादा परिमाण में इश्वर के चमत्कारी ऊर्जा आपके चक्रों से गुजरे इसके लिए आपके चर्कों का उर्जा स्तर और बढाने की जरूरत है जो इस दीक्षा के माध्यम से होता है |

गीता में श्री कृष्ण ने कहा था की जब जब धर्म की हानि होती है , तब तब मैं अवतार लेता हु | जरूरी नहीं की पुराणों में जो अवतार के वर्णन हों वही होंगे | इश्वर समय समय पे उच्च कोटि के साधकों के रूप में भी जन्म लेता है और तब उनकी शक्ति , ज्ञान से लोगों के अध्यात्मिक स्तर में बदलाव आता है | गुरु के अंदर में जो गुरु तत्व है वही तो इश्वर की शक्ति है | धर्म की हानि तभी होती है जब लोगों का अध्यात्मिक स्तर निचे गिर जाता है | फिर ये सोच पाने में अक्षम हो जाते हैं की क्या बुरा है और क्या अच्छा | स्वार्थ से प्रेरित होकर गलत काम करते हैं और अंधकार के गर्त में चले जाते हैं | अभी का समय ऐसा है की कोई भी व्यक्ति बहुत उपर उठ सकता है और बहुत निचे भी गिर सकता है | जितनी फैसिलिटी अभी के समय में है उतनी पहले नहीं थी | आज इन्टरनेट , टी वी या और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से कोई भी किसी से जुड़ सकता है | पहले तो अधिकाँश समय गुरु की खोज में ही निकल जाता था | लोग ऐसे ही जिंदगी जिए चले जाते थे और जो गुरु मिलते थे वो कान फूंक कर मन्त्र दे कर निवृत हो जाते थे , उनका कार्य पूरा हो जाता था | दीक्षा मिल गयी तो लोग सोचते थे की अब वैकुण्ठ लोक पक्का हो गया | पर अध्यात्म के क्षेत्र में कुछ भी अन्धकार में नहीं होता है , कोई भी व्यक्ति अपने अंतर आत्मा में झाँक कर देख सकता है की उसका अध्यात्मिक स्तर क्या है | जब इस संसार में रहते हुए कोई अध्यात्मिक उपलब्धि नहीं है , शांति नहीं है तो फिर मरने के बाद अचानक से वैकुण्ठ लोक का स्वप्न देखना मुर्खता ही होगी |अभी जब इतने साधन आसानी से उपलब्ध हैं तो हमें पूरी शक्ति से प्रयास करना चाहिए , अध्यात्मिक प्रयोग करके देखने चाहिए और जो खुद को अच्छा लगे उसपे चलकर आगे बढ़ना चाहिए |
रेकी का अवतरण :-

डॉक्टर मिकाओ उसुई जापान में प्रोफेसर थे | बाइबिल में लिखे हुए इसा मसीह की द्वारा किये गये चमत्कारों का वर्णन अपने क्लास में करते थे | एक स्टूडेंट ने उनसे पूछा की क्या उनको इन चमत्कारों का कोई वास्तविक अनुभव है | जैसा की इसा मसीह ने लोगों की बिमारिओं को ठीक कर दिया था क्या आप करके दिखा सकते हैं ? अगर नहीं तो फिर हम नहीं मानेंगे | मिकाओ उसुई बहुत सोच में पड़ गये और ठान लिया की जबतक उन्हें ऐसी कोई विधि या शक्ति नहीं मिल जाती वो प्रयास जारी रखेंगे | इसकी खोज में वो कॉलेज से बाहर निकल कर अनेको देशों में भ्रमण किया | अनेक धर्मो के धर्म ग्रंथों का अध्ययन किया खोज की पर उन्हें कुछ भी हाथ नहीं लगा | इसके लिए उन्होंने संस्कृत , चीनी इत्यादि भाषाएँ सीखी , बुद्धिस्ट संस्थाओं में सालों अध्ययन किया , अनेक मास्टर से मिले पर उन्हें कुछ ख़ास पता नहीं चल पाया | दशक बीत गये खोज में अंत में उन्होंने वापस जापान का रुख किया और क्षुब्ध होकर प्रण लिया की पास की पहाड़ी पे जाकर मैं ध्यान करूँगा और जबतक इश्वर से कुछ उपलब्धि ना हो वापस नहीं लौटूंगा प्राण त्याग दूंगा | अपने लोगों को ऐसा कह कर की , 30 दिन बाद अगर मैं नहीं लौटूंगा तो मेरी हड्डियाँ इकट्ठी करने आ जाना | पहाड़ी की गुफा में पूर्ण शक्ति से वे अत्यंत गहन और लगातार ध्यान साधना में जुट गये | बिना खाए पिए लगातार साधना से , 30 दिन बीत गये थे . कठिन तपस्या से शरीर में जान नहीं बची थी , मरणासन्न होकर वो लेट गये तभी उन्हें उपर से दिव्य प्रकाश आता दिखा और रेकी का दिव्य ज्ञान मिला | उन्हें इश्वर के द्वारा पूर्ण अध्यात्मिक ज्ञान और सन्देश प्राप्त हुआ | उनकी तपस्या सफल हुई थी | प्रसन्न होकर वो वहां से उठे और अपने कृशकाय शरीर की शक्ति को एकजुट कर किसी तरह निचे उतरे | उनकी हाथों में गजब का ऊर्जा प्रवाह महसूस हुआ और उनको लगा की इस उर्जा से किसी की भी चिकित्सा की जा सकती है | इस स्थिति में एक लड़की ने उन्हें देखा और घर खाना खाने को आमंत्रित किया | घर के लोगों ने उनकी बहुत सेवा की जिससे उनके जान में जान आई | इस लड़की के गले में सुजन थी और तेज दर्द था , मिकाओ उसुई ने उनके माता पिता से पूछा की क्या मैं इसके गले पे हाथ रख सकता हु ?
माता पिता की आज्ञा से मिकाओ उसुई ने उसके गले पे हाथ रखा और चमत्कार जैसा ही दर्द गायब हो गया और धीरे धीरे सुजन सही हो गया | ये थी रेकी के पहली चिकित्सा | इसके बाद रेकी का प्रचार बहुत तेजी से हुआ | अभी सौ साल भी पुरे नहीं हुए हैं और रेकी से पूरी दुनिया के लोग प्रभावित हैं |

रेकी का शाब्दिक अर्थ है ब्रह्मांडीय उर्जा | रे मतलब ब्रह्माण्ड और की मतलब उर्जा | ऐसी उर्जा जो पुरे ब्रह्माण्ड में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है | इससे कोई कर्म बंधन का सृजन नहीं होता क्यूंकि हम बस माध्यम होते हैं | चिकित्सा इश्वर की ऊर्जा ही कर रही होती है | हीलर रेकी से प्रार्थना करते हैं और सेशन के बाद रेकी और इश्वर का धन्यवाद करते हैं |

डॉक्टर मिकाओ उसुई ने रेकी का ज्ञान दुखों से पीड़ित झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों को प्रचुरता से बांटा | कई लोगों को बिना किसी दक्षिणा के attunement ( दीक्षा ) दी | पर लोगों ने इसके महत्त्व को नहीं समझा | ऐसा होता है की कोई भी चीज अगर मुफ्त में मिल जाए तो उसका महत्त्व ख़त्म हो जाता है | लोग ऐसा समझते हैं की अरे ये तो फालतू है ऐसे ही मिल गयी | रेकी का प्रचार प्रसार हयाशी तकाता ने किया जिन्हें एक लाइलाज बिमारी से मुक्ति रेकी के माध्यम से मिली थी | लोगों में इसका महत्व स्थापित और रेकी को गंभीरता पूर्वक चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित करने में इतना ही हाथ है | इनके बारे में आगे विस्तार से चर्चा करेंगे | इन्होने रेकी दीक्षा के लिए बहुत ज्यादा चार्ज रखने की आज्ञा दी | इसे किसी भी तरह मुफ्त में ना दिया जाए और मास्टर अपने सहूलियत से अच्छा चार्ज रखें | जिससे की लोग इसका महत्त्व समझेंगे और अभ्यास से अपना और दुसरे का शारीरिक , मानसिक और अध्यात्मिक विकास करेंगे |

 

मेरी सोच :-

दीक्षा में मास्टर का समय , उर्जा और ज्ञान लगता है इसीलिए कर्म बंधन का सृजन होता है | लेन देन रखने से अनावश्यक बंधन ख़त्म हो जाते हैं इसिलए चार्ज करना बहुत जरूरी है | मैंने काफी समय तक इस्पे सोचा की अगर ये ऊर्जा हर जगह उपलब्ध है तो दीक्षा देने में पैसे क्यूँ देने चाहिए | लेकिन कर्म बंधन ना बने इसीलिए ऐसा करना बहुत जरूरी है | हाँ अगर किसी को चिकित्सा देना जरूरी हो और व्यक्ति उतना सक्षम नहीं हो तो करुणा करके फ्री भी दिया जा सकता है | मेरा मानना है की रेकी सबको मिलनी चाहिए क्यूंकि ये मनुष्य का सम्पूर्ण विकास करता है | ये अपने आप में पूर्ण अध्यात्मिक पैकेज है | मात्र इसके अभ्यास से ही सारे दुखों से मुक्ति मिल सकती है सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो सकता है | रेकी आपके अनजाने में भी काम करती रहती है | साधक का हर स्तर पे खुद ब खुद चिकित्सा करती रहती है | रेकी से होने वाले कार्यों की सम्भावना अपार है , ये इश्वर की शक्ति का इस समय और इस रूप में आगमन मनुष्य का हर प्रकार से कल्याण के लिए हुआ है | आप भी अपने नजदीकी किसी रेकी मास्टर से अध्यात्मिक दीक्षा जरूर लें और इसका प्रभाव अपनी जिंदगी में देखें | एक बात और , एक बार रेकी मिलने पे ये जिंदगी भर आपके साथ रहती है आपको आगे बढाते रहती है |

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रेकी की दीक्षा विधि | Reiki Attunement ( Indore , Madhya Pradesh)

onkar kumar
I am a software enginner in an MNC with deep interest in spiritual stuffs . I have knowledge of healing such as Reiki , Prana voilet healing , Crystal healing etc .
I am Reiki Grand master , love meditation and inspire everyone to experience peaceful and blissful life .
It would be awesome if you would share your knowledge and experience . Thank you .