Reiki Chakra balancing and meditation

चक्र उन महत्वपूर्ण उर्जा केन्द्रों को कहा जाता है जहाँ पे ऊर्जा का ठहराव होता है | मुख्यतः सात चक्रों के अलावा कुछ चक्र हमारे सर के उपर होते हैं और कुछ पैर के निचे भी | रेकी में मुख्य चक्र के साथ हथेलियों के मध्य में स्थित उर्जा केन्द्रों का भी महत्व है | हथेलियों के इन दो चक्रों के माध्यम से ही रेकी उर्जा का बहाव होता है | बड़े बुजुर्ग को जब हम प्रणाम करते हैं तो वो हमारे सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद देते हैं | वो आशीर्वाद और कुछ नहीं अध्यात्मिक ऊर्जा ही है जिसका प्रवाह हथेलियों से होता रहता है | ऐसा नहीं है की रेकी लेने के बाद ही ये चक्र खुलेंगे और ऊर्जा का प्रवाह होगा | किसी भी अध्यात्मिक व्यक्ति के हथेलिओं से निकलती ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं | ये ग़लतफ़हमी है की किसी का चक्र बंद है | अगर कोई भी चक्र बंद हो जाएगा तो इंसान जिन्दा नहीं बचेगा | जैसे मणिपुर चक्र पेट , लीवर किडनी को कण्ट्रोल करता है , अगर मणिपुर चक्र बंद हो जाएगा तो ये सब अंग काम करना बंद कर देंगे और व्यक्ति की मृत्यु हो जायेगी | चक्र बंद नहीं होते पूरी तरह बल्कि उनमे ब्लॉकेज होने से उर्जा का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता | अगर किसी का एक चक्र ज्यादा खुला हुआ है तो निचे / उपर के चक्रों में उर्जा का प्रवाह ठीक से नहीं हो पायेगा और उस चक्र में ज्यादा ऊर्जा जमा हो जाने से व्यक्ति बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाएगा | जैसे मणिपुर चक्र को लीजिये , ये हमारे अंदर तेजस्विता को बढाता है , आत्मबल और कार्य क्षमता प्रदान करता है | अगर ये चक्र बहुत ऊर्जावान हो जाए तो व्यक्ति का रवैया आक्रामक हो जाएगा , अपनी बात से टस से मस नहीं होगा , ऐसा कह सकते हैं को बहुत ज्यादा dominate करेगा | कम उर्जा भी ठीक नहीं , ऐसा होने से व्यक्ति में कार्यक्षमता ख़त्म हो जाएगी और आत्मबल घटने से डिप्रेशन में चला जायेगा | इसीलिए चक्रों की उर्जा को संतुलित करना जरूरी है | जितनी उर्जा की जरूरत है उतनी मिले , संतुलन हो और ज्यादा उर्जा को ग्राउंड कर दिया जाए | रेकी चक्र ध्यान से ये ब्लॉकेज को हटा कर , चक्रों को उर्जावान और संतुलित किया जाता है जिससे व्यक्ति का सार्वभौम विकास हो , अध्यात्मिक और सांसारिक जीवन संतुलन में हो |

चक्रों के रंग और स्थान की जानकारी होना बहुत जरूरी है | जैसा की पहले ही बताया गया है की रंग का सम्बन्ध एक निश्चित फ्रीक्वेंसी से होने के कारण एक निश्चित ऊर्जा की मात्रा से है | किस चक्र को कितनी ऊर्जा चाहिए वो उस चक्र से सम्बंधित रंग के गहरे चमकीले होने से है | हम तब तक हीलिंग देंगे जब तक ब्लॉकेज ख़त्म होकर , चक्र अपने रंग में तीव्रता से चमकने ना लगे उसके बाद ज्यादा या कम उर्जा का संतुलन करेंगे |

चक्रों के रंग और स्थिति 

 

सहस्रार, (संस्कृत: सहस्रार, Sahasrāra) शीर्ष चक्र (सिर का शिखर; एक नवजात शिशु के सिर का ‘मुलायम स्थान’)

आज्ञा, (संस्कृत: आज्ञा, Ājñā) ललाट या तृतीय नेत्र (चीटीदार ग्रंथि या तृतीय नेत्र)

विशुद्ध, (संस्कृत: विशुद्ध, Viśuddha) कंठ चक्र (कंठ और गर्दन क्षेत्र)

अनाहत, (संस्कृत: अनाहत, Anāhata) ह्रदय चक्र (ह्रदय क्षेत्र)

मणिपूर, (संस्कृत: मणिपुर, Maṇipūra) सौर स्नायुजाल चक्र (नाभि क्षेत्र)

स्वाधिष्ठान, (संस्कृत: स्वाधिष्ठान, Svādhiṣṭhāna) त्रिक चक्र (अंडाशय/पुरःस्थ ग्रंथि)

मूलाधार, (संस्कृत: मूलाधार, Mūlādhāra) बेस या रूट चक्र (मेरूदंड की अंतिम हड्डी *कोक्सीक्स*)

chakra chart

अब आते है विधि पर |

पहले के पोस्ट में बताया गया रेकी प्रार्थना , ग्राउंडिंग और औरा सुरक्षा करें |
(इस लिंक पे क्लिक करें )

अब ब्रह्माण्ड से उतरती हुई तीव्र रेकी के प्रकाश को अपने सहसत्रार चक्र पे उतरती हुई महसूस करें | सहस्त्रार चक्र की स्थान एक गेंद जैसा समझ सकते हैं जो आधा सर के अंदर और आधा बाहर है | दोनों हथेली को अपने सामने सर से टिका कर ऐसे रखें की ऊँगली सर के उपर हो जिससे पुरे चक्र की हीलिंग हो | उसके बाद आज्ञा चक्र की हीलिंग करेंगे | प्रथम डिग्री वाले यहाँ ध्यान दें की दोनों हाथों को एक साथ नहीं उठाना है , एक हाथ हमेशा शरीर के संपर्क में रहना चाहिए क्यूंकि अपनी आपको डिस्टेंस सिंबल नहीं मिला है | एक हाथ उठा कर सर के पीछे आज्ञा चक्र पे रखें और फिर दुसरे को सर के आगे | विशुद्ध में गले के आगे और पीछे हाथ रखेंगे और बांकी सब में दोनों हाथ सामने की तरफ ही होंगे |

एक बात और ध्यान रखें मणिपुर चक्र की स्थिति नाभि से 2-3 अंगुल उपर है और स्वधिस्ठान का तीन अंगुल निचे , नाभि को हाथ से कभी नहीं ढकें |

हर चक्र को तीन मिनट देंगे | इस तरह से सात चक्रों में 21 मिनट लगेंगे |

  1. एक मिनट तक रेकी से प्रार्थना करें की – हे रेकी आप मेरे अमुक ( चक्र का नाम ) के ब्लॉकेज को दूर करें और इसे स्वस्थ करें | और उस चक्र के ब्लॉकेज खुल रहे हैं , नकारात्मकता ख़त्म हो रही है ऐसी भावना करते हुए ऊर्जा देंते रहे
  2. फिर एक मिनट तक रेकी से प्रार्थना करें की – हे रेकी आप मेरे अमुक ( चक्र का नाम ) को उतनी ऊर्जा दें जितने की इसे जरूरत है | और उस चक्र का रंग पूरी तरह गहरा और चमकीला हो रहा है ऐसी भावना करते हुए ऊर्जा दें |
  3. फिर एक मिनट तक रेकी से प्रार्थना करें की – हे रेकी आप मेरे अमुक ( चक्र का नाम ) के कम या ज्यादा उर्जा को संतुलित करिए | और उस चक्र को ऊर्जा दें
  4. और अंत में रेकी से प्रार्थना करें की – हे रेकी आप मेरे सातों चक्रों की ऊर्जा को संतुलित करिए | रेकी के तीव्र प्रकाश के प्रवाह को पुरे रीढ़ की हड्डी में महसूस करिए|

अब रेकी का धन्यवाद करिए | दोनों हाथों को जोड़ से रगड़िये ,अपनी आखों को ढकिये और धीरे धीरे आखों को खोलिए |

अब आप खुद देखिये की क्या फर्क पडा है | आपके दिल से खुद ये आवाज आएगी – रेकी का धन्यवाद ( Thanks to Reiki) :)

अब आप उठ सकते हैं |

onkar kumar
I am a software enginner in an MNC with deep interest in spiritual stuffs . I have knowledge of healing such as Reiki , Prana voilet healing , Crystal healing etc .
I am Reiki Grand master , love meditation and inspire everyone to experience peaceful and blissful life .
It would be awesome if you would share your knowledge and experience . Thank you .